नीमच। विगत दिनों रीवा में जैन समाज की दो साध्वीयों का वाहन दुर्घटना में अवसान समाज के लिए बड़े दुख का विषय है। भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ती नहीं हो इसके लिए समाज को संगठित होना चाहिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को भी इसके लिए अवगत करना चाहिए ।
सामाजिक एकता के बिना युवा पीढ़ी का विकास नहीं हो सकता है।यह बात वैराग्य सागर जी महाराज ने कहीं। वे दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे ।उन्होंने कहा कि वातानुकुलित सुविधा से मनुष्य सहनशील नहीं रह पाता है। एयर कूल्ड से शरीर की बीमारियां बढ़ रही है ।मनुष्य कमजोर हो रहा है मनुष्य को हर परिस्थिति में सहनशील बनने का अभ्यास करना चाहिए तभी आत्म कल्याण की और अग्रसर हो सकता है। मनुष्य दूसरों की होड़ करने में अपना तनाव बढ़ा लेता है।
धर्म सभा में मुनी सुप्रभ सागर जी महाराज ने कहा कि संसार में सभी प्राणियों को अपने प्राण प्रिय होते हैं। जब पाप कर्म उदय में आता है तो चक्रवर्ती का साथ देने वाला भी कोई नहीं होता है। मनुष्य परंपराओं की रक्षा करने के लिए जाप करने को भी तैयार रहता है। प्राचीन काल में व्यक्ति धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों को त्याग देता था। आधुनिक युग में व्यक्ति अपने प्राणों की रक्षा के लिए धर्म का त्याग कर देता है चिंतन का विषय है।
संसार में सभी प्राणि अपने प्राणों की रक्षा करने के लिए सब कुछ करने को तैयार रहते है।दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विमल सरावगी जैन जीटी एवं मीडिया प्रभारी अमन विनायका ने बताया कि इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य शांति सागर जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर समाजजनों के द्वारा किया गया। मंगलाचरण इना अजमेरा ने प्रस्तुत किया।मुनि श्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र दान समाज जनों द्वारा प्रदान किया गया।
