मध्यप्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट का चुनाव अब केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक जंग बनता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन निरस्त कर दिया, जबकि कांग्रेस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। नामांकन जांच के दौरान विधानसभा परिसर में हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे की स्थिति बनी रही। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उनकी उम्मीदवार को चुनावी मुकाबले से बाहर करने के लिए तकनीकी आधारों का सहारा लिया गया है, जबकि भाजपा का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया में नियमों का पालन अनिवार्य है और तथ्यों को छिपाने पर कार्रवाई स्वाभाविक है। इधर, राज्यसभा चुनाव को लेकर संभावित राजनीतिक उठापटक की आशंकाओं के बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने का फैसला किया है। चार्टर्ड विमान से विधायकों को रवाना किए जाने के घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति को और गर्मा दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा संख्या बल जुटाने के लिए राजनीतिक दबाव और प्रलोभन की राजनीति कर रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। बीते कुछ दिनों से कांग्रेस विधायकों की बैठक में कई विधायकों की अनुपस्थिति, फिर भाजपा पर विधायकों को तोड़ने के आरोप, और अब प्रत्याशी का नामांकन खारिज होना—इन घटनाओं ने राज्यसभा चुनाव को बेहद दिलचस्प और संवेदनशील बना दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस आगे क्या कानूनी और राजनीतिक कदम उठाती है और क्या यह मामला चुनावी मुकाबले से निकलकर बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता है। मध्यप्रदेश की राजनीति में अगले कुछ घंटे और दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।