BIG_NEWS : शहर में एक गली नुमा कमरे में प्राइवेट संस्थाओं में हजारों रुपए महीने की नौकरियां देने के नाम पर चल रहा था गोरखधंधा, तहसीलदार ने बनाई एक योजना जिस में फस गए सारे आरोपी, फिर लिया एक्शन, तो खुले कई राज, कार्यालय को किया सील, पढ़े खबर

MP 44 NEWS September 17, 2022, 5:14 pm Technology

मंदसौर में प्राइवेट संस्थाओं में हजारों रुपए महीने की नौकरियां देने के नाम पर चल रहे गोरखधंधे का प्रशासन-पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।

राही कंसलटेंसी एजेंसी पिछले 3 महीने से नौकरी दिलवाने के नाम पर शहर के युवाओं से ऑनलाइन धोखाधड़ी कर रही थी। सोशल मीडिया और प्रिंट विज्ञापन के जरिए संस्था बेरोजगार, युवक-युवतियों को डेढ़ से 2 हजार रुपए लेकर संस्था के खाते में ऑनलाइन जमा करवा रही थी। इसके बदले संस्था के लोग बेरोजगारों को बैंकों, सहकारी समितियों और निजी कंपनियों में मैनेजर, एचआर एक्सक्यूटिव और गार्ड की नौकरी दिलवाने का झांसा दे रहे थे। ड्राइवर लेकर पहुंचे तहसीलदार, फिर फंसााया

शहर के बालागंज इलाके में एक गली नुमा कमरे में पिछले 3 महीने से चल रहे इस फर्जीवाड़े की प्रशासन को जब भनक लगी तो खुलासे के लिए तहसीलदार मुकेश सोनी खुद अपने ड्राइवर को नौकरी दिलवाने के लिए मौके पर पहुंच गए। यहां उन्हें डिलेवरी बॉय की नौकरी देने के लिए झांसा दिया, इसके बदले में रजिस्ट्रेशन फीस के डेढ़ हजार रुपए मांग की गई। तहसीलदार सोनी ने ऑनलाइन रुपए ट्रांसफर भी कर दिए, इसके तुरंत बाद शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। मौके से रिसेप्शनिस्ट युवती और एक युवक को हिरासत में लिया है। इस मामले में बड़ा खुलासा होने की संभावना है। सिटी कोतवाली थाना पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पूरे रैकेट में शामिल लोगों की तह तक जाने के लिए जांच कर रहे हैं।

बेरोजगारों को जाल में ऐसे फंसाते थे थाने आई युवती ने बताया कि वह कुछ दिन पहले ही एक महिला के जरिए दो हजार रुपए देकर रूही कंसलटेंसी नाम की कम्पनी में रिशेपनिस्ट के पद पर आई है। उसे पांच हजार माह वेतन देने की बात कही गई थी। ऑफिस में श्रीराम नाम का एक युवक के साथ वह काम करती थी। मनोज नाम के सर केवल फोन पर ही बात करते थे। वे फोन नंबर उपलब्ध करवाते थे। उसका काम फोन लगाकर बेरोजगारों से संपर्क करने का था। इसके साथ ही जो नौकरी की तलाश में आता उसे नौकरी देने का भरोसा दिलाया जाता। इसके बाद किसी मनोज नाम के शख्स से बात कराई जाती थी। वह ग्राहक को भरोसे में लेता। फिर रजिस्ट्रेशन के नाम पर क्यू आर कोड के जरिए डेढ़ से दो हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कराए जाते। इसके बाद नौकरी का झांसा देते हुए कई बार अलग-अलग फॉर्मलिटी के नाम पर रुपए ट्रांसफर करवा लिए जाते थे।

पैसे लेने का तरीका 'ऑनलाइन'

हर बार रुपए लेने का तरीका ऑनलाइन ही होता था। ग्राहक ऑनलाइन ही ट्रांसफर कराए जाते थे। तहसीलदार मुकेश सोनी ने बताया कि यह बड़ा नेक्सस है। हमने कार्यालय को सील कर दिया हैं। इन लोगों ने कई बेरोगार युवक-युवतियों को ठगा है।

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