मंदसौर में विराजमान भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा में कई दरार आ गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह आज से नहीं बल्कि वर्षों से धीरे-धीरे हो रहा है। बताया जाता है कि यह प्रतिमा ढाई हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है। पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने आज (सोमवार) सुबह एक्स पर एक पोस्ट किया। लिखा कि श्रद्धा, भक्ति और आस्था का केंद्र "भगवान पशुपतिनाथ महादेव" की दिव्य एवं नयनाभिराम अष्टमूर्ति प्रतिमा दशपुर की नगरी मंदसौर (मध्य प्रदेश) में विराजित है। आशंका जताई जा रही है और संभावनाएं बताई जा रही है कि "प्रतिमा के मुख पर दरार पड़ रही है", यदि ऐसा है तो तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बनाकर, जानकारों से सलाह लेकर प्रतिमा के क्षरण को रोका जाए। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव और भारत सरकार के पुरातत्व विभाग को टैग कर आवश्यक दिशा निर्देश एवं उचित कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया है। मंदिर प्रबंधक बोले- दरार आज से नहीं पूर्ववर्ती हैं मंदिर प्रबंधक राहुल रूनवाल ने कहा कि श्री पशुपति नाथ मंदिर में देखने में आ रहा है कि कुछ फोटो वायरल हुआ है। पंडित जी ने बताया है कि ये दरारें अभी की नहीं विगत कई वर्षों की है। मंदिर समिति द्वारा इसका आर्कियोलोजिकल डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों को बुलाकर यह बताया भी जाता है। कई बार इसका ट्रीटमेंच भी करवा चुके हैं। वो दरार आज से नहीं पूर्ववर्ती हैं। दरार कबसे है यह मैं नहीं बता सकता लेकिन समय-समय पर एक्सपर्ट्स आकर इसे देखते हैं। मंदिर समिति उचित निर्णय लेकर इसके लिए कार्य करेगी। वहीं, मंदिर के पुजारी राकेश भट्ट ने बताया कि ये दरार यथावत काफी पुराने समय से है। उन्होंने बताया कि मैंने जबसे यहां पूजा-पाठ शुरू की है तबसे यह देखते आ रहा हूं। यथावत ऐसी ही स्थिति में बनी हुई है। कोई नई दरार नहीं बनी है। प्रतिमा में क्षरण जैसी बात है वैसा कुछ नहीं है। पूर्व में जो जल चढ़ाने समेत प्रतिबंध लगाए गए सबसे ऐसा कुछ यहां देखने में नहीं आया है। पुजारी ने बताया कि अभी ऊपर जल चढ़ाना केवल पुजारी का काम है, भक्त जो जल चढ़ाते हैं वो केवल चरणों में चढ़ता है। पहले भक्त दूध, पंचामृत खुद चढ़ाते थे। जिसके कारण क्षरण जैसी स्थिति उत्पन्न होती थी। अभी यह केवल निर्धारित शुक्ष्म मात्रा में होता है, क्योंकि भगवान भोलेनाथ का अभिषेक होता है।