*KHABAR : गर्मी से मानव स्वास्थ्य पर होने वाले दूष्प्रभाव से बचाव व रोकथाम की जागरूकता, पढ़े MP44 NEWS खबर*

MP44 NEWS May 6, 2026, 6:36 pm Technology

नीमच | माह मार्च से माह जुलाई तक तापमान में बढ़ोत्तरी परिलक्षित होती है, वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण जलवायु परिवर्तन से तापमान में हो रही वृद्धि के कारण हमारे स्वास्थ्य पर मौसम का दुष्प्रभाव परिलक्षित होता है। जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.दिनेश प्रसाद ने बताया, कि अधिक तापमान के कारण होने वाले स्वास्थ्य पर दूष्प्रभावों की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए समयानुसार उपाय किये जाए, ताकि मानव स्वास्थ्य को होने वाली हानि से यथासंभव बचाया जा सकें। लू (heat stroke)- हीट स्ट्रोक (सन स्ट्रोक) शरीर की वह अवस्था है जिसमें गर्मी के कारण शरीर का तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस (104.0 डिग्री फारेनहाइट) के पास पहुँच जाता है और मन में उलझन की स्थिति रहती है। यह स्थिति एकाएक आ सकती है या धीरे-धीरे। इस समस्या की जटिल अवस्था होने पर किडनी काम करना बन्द कर सकती है। लू लगने पर अगर तुरंत उपचार न मिले तो मृत्यु भी हो सकती है। इसलिये पर्याप्त मात्रा में पानी अवश्य पिये, छोटे बच्चों को कपड़े से ढककर छाया वाले स्थान पर रखें। गर्मियों में पसीना अधिक आने के कारण शरीर की त्वचा पर भी असर होता है। पसीना शरीर पर आता रहता है और जमता रहता है जिसके कारण त्वचा पर कई बार खुजली कि होने लगती है और गर्मी से एलर्जी हो जाती है और लाल हो जाती है। कई बार ज्यादा खुजली करने के कारण शरीर बहुत लाल हो जाती है। शरीर की त्वचा पर घुमन सी होती है जिसके कारण इसे कांटेदार गर्मी भी कहा जाता है। हीट रेशेज के लक्षण - छोटे गुलाबी या लाल रंग की त्वचा या फिर छोटे छोटे दाने निकलना। जलन, खुजली या त्वचा पर चुभन सी महसूस होना ऐसा तब होता है जब शरीर का पसीना आसानी से वाष्पित नहीं हो पाता। क्या उपाय करें - ठंडे पानी और कूलर की सहायता से शरीर का तापमान नियंत्रित करें। ढीले सूती कपड़े पहने। प्रभाव को कम करने के लिए विशेष प्रकार के सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग करें। जितना संभव हो सके त्वचा को साफ और शुष्क बना कर रखें । इससे संक्रमण की संभावना कम होती है। गर्मी में घर से बहार निकलते वक्त छाते का प्रयोग अवश्य करें। घर से बाहर पानी या ठंडा शरबत पी कर ही बाहर निकले जैसे आम पन्ना और शिकंजी ज्यादा फायदेमंद है। घर से बाहर जाते समय पीने का पानी साथ में लेकर जाए। अगर तेज धूप में थे तो एकदम से ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। निर्जलीकरण(Dehydration) - गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसा तब होता है जब कोई काफी समय से काम में व्यस्त है या ज्यादा शरीरिक कार्य (body work) करता है और यदि काफी समय से पानी नहीं पीया जाए इससे गर्मी में डीहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। शरीर को निर्जलीकरण (dehydration) से बचने के लिए नियमित रूप से थोड़े थोड़े समय बाद पानी पीना आवश्यक है, अगर किसी का गला बार बार सूख रहा है तो ये संकेत है कि उसका शरीर में पर्याप्त पानी (hydration) नहीं है। यदि किसी दिन बहुत ज्यादा गर्मी है उस दिन ज्यादा व्यायाम से बचें क्योंकि इससे शरीर का पानी जल्दी सूखता है। सुबह जल्दी और देर शाम जब ठंडक हो तभी व्यायाम किया जाना चाहिए। निर्जलीकरण (Dehydration), ज्यादा पसीना आ जाना, कमजोर या थका हुआ महसूस करना, शरीर का तापमान बढ़ना, त्वचा का रंग पीला पड़ना या चेहरा पीला पढ़ना, मितली / उल्टी जैसा महसूस करना, बेहोशी आना। क्या उपाय करें- अगर घर से बाहर है और निर्जलीकरण के संकेत मिलें तो किसी छाया वाले और शांत जगह पर आराम करें। इलेक्ट्रॉल/ओ.आर एस / फलों का रस आदि पेय पदार्थों का निरंतर सेवन करते रहे। कॉर्बोनेटेड और कैफीन युक्त पेय से बचें।

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