उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, जिला-नीमच एवं राजस्व अधिकारीयों द्वारा मेरे संज्ञान में लाया गया है कि नीमच जिले में रबी फसल की कटाई के पश्चात जगली फसल के लिए खेत तैयार करने हेतु बहुसंख्यक कृषकों द्वारा अपनी सुविधा के लिए खेत में आग लगाकर गेंहू के डंठलों को जलाया जाता है, इसको नरवाई में आग लगाने की प्रथा के नाम से जाना जाता है। नरवाई में आग लगाने के कारण विगत वर्षों में गंभीर स्वरुप की बचि दुर्घटनाएं घटित हुई है. जिसके कारण मकानों में आग लगने में, समीप के खेतों में खड़ी फसल भी बाग के कारण जलकर नष्ट हुई है, जिस कारण जन, धन एवं पशु हानि हुई है, साथ ही पनासन के लिए कानूनी व्यवस्थापन की स्थिति निर्मित हुई है, बाम से उत्सर्जित होने वाली हानिकारक गैसों के कारण बायु मंडल एव पर्यावरण प्रदुषित हुना है, जिस कारण वायु मंडल में विद्यमान ओजोन परत भी प्रभावित हुई है और इस कारण पराबैंगनी हानिकारक किरणें पृथ्बीए तवयंहुचती है, जो कि मानव, पशुओं के लिए रोगजन्य होती है। म.प्र. शासन पर्यावरण विभाग द्वारा क्रमांक/एफ-12-37/2017/18-5 भोपाल दि. 15 मई 2017 द्वारा बायु (पद्यण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 19 (1) के अन्तर्गत जारी अधिसूचना क्रमांक 1481-1473-32-88 दिनांक 09 मार्च 1988 के माध्यम से वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 के प्रावधानों के अनुपालन हेतु संपूर्ण मध्यप्रदेश को वायु प्रदुषण नियंत्रण हेतु अधिसूचित किया गया है। मध्यप्रदेश में बायु प्रदुषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 19 (5) के तहत नरवाई जलाना तत्समय में तत्काल प्रतिबंधित किया गया है, जो कि वर्तमान में निरंतर है। पर्यावरण विभाग द्वारा उक्त अधिसूचना अन्तर्गत नरवाई में आग लगाने वालों के विरुद्ध पर्यावरण क्षतिपूर्ति हेतु निश्वानुसार दण्ड का प्रावधान किया गया है। अ) 2 एकर तक के कृषकों को रुपमें 2500/- का अर्थदण्ड प्रति घटना ब) 2 से 5 एकड तक के कृषकों की गपचे 5000/- का अर्थदंड प्रति घटना स) 5 एकर में बड़े कृत्षकों को रुपयें 15000/- का अर्थदंड प्रति घटना नरवाई जलाने से भूमि की उर्वरता एवं उत्पादकता निश्रानुसार प्रभावित होती है- 1- खेत में आग लगने से खेत के माइक्रोफ्लोरा एवं माइक्रोफोना नष्ट हो जाते है। 2. मुदा एक जीवित माध्यम है क्योंकि इसमें असंख्यक सूक्ष्म जीव यथा बैक्टरीयां, कंगन, महजीचित्ता निर्वहन करने वाले मुख्य लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते है, जोकि भूमि की उर्वरता एवं उत्पादकता में सहायक होते है। ३- नरवाई जलाने से खेत की उर्वरता में लगातार गिरावट आ रही है. जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकुल असर पह रहा है। 4- खेतो में विद्यमान नरवाई एवं फसल अवशेष, मुदा में विद्यमान माइक्रोक्लोरा द्वारा अपचटित होकर जैविक खाद में परिवर्तित हो जाते है, जो कि मृदा के हुयूमस में वृद्धि करते है और इस प्रकार मृदा की उर्वरता एवं उत्पादकता निरंतर बनी रहती है, जबकि आग लगाने में इस लाभ से बुदा वंचित रह जाती है। 5- नरवाई जलाने से भूमि की जन धारण क्षमता एवं बोये गये बीज की अंकुरण क्षमता भी प्रभावित होती है। 6- नरवाई जलाने से भूमि की लवण सांधता प्रभावित होती है, जो कि पौधी द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण की दर निर्धारित करती है। उपरोक्तानुसार वायुमंडल पर्यावरण एवं भूमि की क्षति की दूहिनात रखते हुए सार्वजनिक हित में नरवाई जलाने की प्रथा पर तत्काल अंकुल लगाने हेतु मैं, हिमांशु चंद्रा कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, जिला-नीमच एतद्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (1) के अंतर्गत जन सामान्य को बाधा, क्षति, मानव जीवन स्वास्थ्य के खतरे के प्रभाव को दूटिगत रखते हुए नीमच जिले की भौगोलिक सीमाओं में खेत में खड़े गेष्ठ के इंठलों (मरवाई) एवं फसल अवशेषों में आग लगाये जाने पर प्रतिबंध लगाता है तथा जिले में समस्त हार्वेस्टर संचालनकर्ताओं को हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मेनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाये जाने हेतु निर्देशित करता है। यह आदेश जारी होने की दिनांक से 02 माह तक की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। (1) क्रमशः 02. (2) यह आदेश आम जनता को संबोधित है। चूंकि वर्तमान में मेरे समक्ष ऐमी परिस्थितियां नहीं है बऔर न ही यह संभव है कि इस आदेश की पूर्व सूचना प्रत्येक व्यक्ति को दी जाने। अतः यह आदेश एक पक्षीय पारित किया जाता है। मादेन की सूचना जन सामान्य को मुनादी द्वारा दी जाये, बादेल की पत्तियां कलेक्टर कार्यालय तहमीन कार्यालय, कृषि उपज मंत्री, पुलिस थाना, जनपद पंचायत, नगर पालिका, वाम पंचायत आदि के सूचना पटल पर चम्पा की जायें, साथ ही ग्राम चौपान एवं भार्वजनिक स्थानों पर भी चस्या की जायें। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्वाय संहिता की धारा 223 के अंतर्गत दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी।