नीमच के पड़ोसी राजस्थानी कस्बे के बाद अब सटोरियों की नापाक निगाहें नीमच जैसे शांत और पॉश इलाको पर पड़ रही है। नामी सटोरियो जो कभी झोपड़ियो के मालिक भी नही हुआ करते थे उन्होने शहर के बीचों-बीच बड़ी-बड़ी बिल्डिंग तान दी। यह अवैध सट्टा शहर से महज 10-15 किलोमीटर दूर गिरदौड़ा-कानाखेड़ा के एक फॉर्म हाउस के पास संचालित हो रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार कालू दासा, दिनेश और तबरेज और विष्णु सहित सैकड़ो नाम शामिल है। सूरज ढलते ही यहा सटोरियो की महफिल पनपने लगती है। हाथो में ताशपत्ती लिए लाखो का दांव लगाया जाता है, घोड़ीदाना में नामचीन सटोरिए बोली लगाते है और हाथ में जाम भी छलकते है।
यह सब काम हमारे नीमच शहर में हो रहे है। यह सटोरिए सट्टा के साथ नशे का अवैध व्यापार भी संचालित करते है। इसके साथ ही अवैध कमाई को जमीनों से खपाने के साथ ही अपना जाल अन्य राज्यों में फैलाते है। सुत्रों की माने तो इन सटोरियो को पुलिस का खौफ़ नही रहता यह मोटी बंदी से कई पुलिसकर्मीयो को खरीदने का दम रखते है। क्या इतना बड़ा अवैध सट्टा, पुलिस के नाक के नीचे संचालित हो। जिसका पता हर आम व खास को है तो पुलिस उससे कैसे अंजान रह सकती है। आखिर इन सटोरियो पर नीमच पुलिस कैसे महरबान है। इसका संज्ञान आला अधिकारियो को लेकर जल्द ही कार्यवाही को अंजाम देना चाहिए वरना नीमच सहित अन्य जिलो के युवा तबाह-बर्बाद होने में वक्त नही लगाएंगें।