नीमच में चाहे बेरोजगारी का मुद्दा हो, भ्रष्टाचार का मुद्दा हो, जर्जर सडको की बात हो, अतिक्रमण हटाओ मुहिम हो, हर मुद्दे पर मुखर होकर सामने आने वाली आम आदमी पार्टी चुनाव आते ही हाशिए पर चली गई। कांग्रेस-भाजपा की मप्र में सरकार होने के बावजूद विपक्ष का रोल अदा करने वाली आम आदमी पार्टी यूं तो अखबारो की और चैनलों की हेडलाइन बनती रही। मगर नगरीय निकाय चुनाव आते ही विलुप्त हो गई। आम आदमी पार्टी ने तकरीबन 40 ही वार्डो में अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन इस चुनाव में कहीं इस पार्टी को जगह नही मिली। कांग्रेस ने इस बार प्रभाव वाले लोगो को उम्मीदवार बनाया तो भाजपा अपने आप में प्रभावशील रही। इधर निर्दलीय भी वन मेन आर्मी की तरह अपनी जमीन मजबूत करते हुए दिखाई दिए, लेकिन आम आदमी पार्टी को कहीं कोई जगह नही मिली। जिसकी खासी वजह धन-बल है। नीमच की जनता ने केजरीवाल की क्रॉनोलॉजी को ठुकरा दिया या फिर विकास के मुद्दे पर स्थानीय आप नेता लोगो को साधने में असमर्थ रहे। कारण चाहे जो रहे हो लेकिन विपक्ष की भूमिका में आम आदमी पार्टी में नीमच में कांग्रेस से मजबूत कार्य कर के दिखाए लेकिन आने वाले परिणाम आम आदमी पार्टी के लिए मायूस करने वाले है। कहीं न कहीं एक बार राजनीति और मतदाताओ का मन कांग्रेस-भाजपा के इर्द-गिर्द घुमता हुआ दिखाई दिया।