नीमच नगरपालिका के लिए जैसे-जैसे समय करीब आता जा रहा है। श्याम-दाम-दण्ड-भेद सब आजमाया जा रहा है। नीमच में नपाध्यक्ष की कुर्सी की हवा तब ओर भी तेज हो गई जब भाजपा द्वारा भोपाल से पर्यवेक्षक अशोक पोरवाल नीमच आए। इधर भाजपा की हाई-प्रोफाइल मीटिंग हुई तो ठण्डें मौसम के बीच नेताओ में गर्मी आ गई। भाजपा के बागी 03 निर्दलीयों ने भाजपा के संपर्क में दिखाई नही दिए और न ही पर्यवेक्षक से मुलाकात की। जिससे साफ जाहिर होता है की भाजपा के बागी भाजपा को समर्थन देने के मूड में नही है। इधर भाजपा कांग्रेस पार्षदों को साधने में जुट गई हैं। इस बात से भी गुरेज नही किया जा सकता है की भाजपा के बागियो की शर्ते शीर्ष नेतृत्व के गले नही उतर रही है इसलिए भाजपा बागियों को मनाने की जगह कांग्रेस के पार्षदों को साधने में आगे है। इधर कांग्रेस भी दमखम के साथ अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल है। कांग्रेस की तरफ से सबसे बड़ा नाम वीणा ब्रजेश सक्सेना का है तो वहीं दूसरा नाम मनीषा ओम दीवान का है। कांग्रेस के पास 14 पार्षद है। अगर कांग्रेस निर्दलीय को अपने खेमे में शामिल करने में सफल हो जाती है तो कांग्रेस के पास 17 पार्षदो की टीम होगी। अध्यक्ष बनने के लिए कांग्रेस को बशर्ते 3 से 04 पार्षदों की दरकार होगी। जाहिर है भाजपा पार्षदो को तोड़ने की जी-तोड़ कोशिश होगी।