नीमच, जैन श्वेताम्बर भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट , जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट विकास नगर एवं आचार्य अपूर्व मंगल रत्न सागर सूरि जी मसा के शिष्य रत्न बंधु त्रिपुटी आगम रत्न सागर जी महाराज ,प्रशम रत्न सागर जी महाराज ,वज्र रत्न सागर जी महाराज, साध्वी वर्या शुद्धि प्रसन्ना जी म. सा, प्रवृधि जी म. सा समृद्धि जी मसा प्रफुल्ल प्रभा जी मसा वैराग्य पूर्णा जी मसा आदि ठाना की पावन निश्रा में महावीर जिनालय जीर्णोद्धार के पश्चात ध्वज दंड कलश प्रतिष्ठा सह प्रथम ध्वजा रोहण अष्टानिहका महोत्सव का शंखनाद विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ किया जा रहा है।जैन श्वेताम्बर भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष अनिल नागौरी, पुर्व अध्यक्ष प्रेम प्रकाश जैन, महावीर जिनालय विकास नगर ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश जैन आंचलिया आदि की उपस्थिति में सभी समाज जनों ने सामूहिक रूप से बंध त्रिपुटी आगमरत्न
महाराज से चातुर्मास के लिए विनती की गई।
नवकारसी के धर्म लाभार्थी बसन्ती लाल सुंदर लाल तातेड परिवार थे। चढावें की बोलियां लगी जिसमें समाजजनो के उत्साह साथ भाग लिया।सुबह 10 बजे लाइव प्रतिमा निर्माण प्रभु के माता-पिता द्वारा जन्म कल्याणक महोत्सव में प्रतिमा निर्माण कारीगर कर्सन भाई ,अमृत भाई,पालीताना गुजरात थे।त्रिशला माता का अभिनय किरण सुराणा, सिद्धार्थ राजा का अभिनय महावीर सुराणा तथा प्रियमवदा दासी का अभिनय सलोनी लोढ़ा ने किया । सलोनी लोढ़ा ने एकल नृत्य के माध्यम से महावीर के जन्म की बधाई की सूचना राजा को दी।
दोपहर 2 बजे 10 बजे दिगपाल अष्ट मंगल रात्रि 8 बजे प्रभु भक्ति एवं संगीतकार विनीत गेमावत द्वारा किया गया । नवकार मंत्र का उच्चारण किया गया। 14सपनों का विस्तार से वर्णन प्रस्तुत किया गया। भगवान के जन्म पर बालिकाओं ने समूह नृत्य प्रस्तुत किया। भक्ति एवं प्रवचन के
धर्म लाभार्थी अख्खे सिंह कोठारी परिवार थे। साधार्मिक वात्सल्य 11:30 बजे भागेश्वर मंदिर नीमच परआयोजित किया गया जिसके लाभार्थी अनिल नागौरी परिवार थे। चांदी की प्रतिमा बनाने के लिए चांदी को भट्टी में डालने च्यवन कल्याणक के चढ़ावें की बोली का धर्म लाभ राकेश चिराग आंचलिया एवं सोनम मुदित बोथरा ने लिया।
-धर्म सभा में उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए व्रजरत्न महाराज साहब ने कहा कि महावीर स्वामी की तपस्या के कारण उनके अंदर सूर्य की तरह तेज और चंद्रमा की तरह शीतलता दोनों ही गुण विद्यमान थे।
आधुनिक युग में हिंसा को रोकने के लिए महावीर के अहिंसा संदेश
की आवश्यकता है। वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है।
नरक के जीव तकलीफ में होते हैं तब उन्हें 5 करोड़ 68 लाख 99हजार584 रोग होते हैं इसलिए हमें सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए ताकि पापों से बच सके। संसार में मोक्ष जाने के लिए च्यवन , जन्म, दीक्षा, केवल ज्ञान सहित पांच कल्याणक होते हैं।
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महावीर स्वामी की रजत प्रतिमा के लाइव निर्माण के दर्शन किए....
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विकास नगर स्थित महावीर जिनालय की प्रतिमा के लिए लगभग 5किलो500ग्राम चांदी का उपयोग किया गया। चांदी का दान समाज जनों ने 100 ग्राम से लेकर 1 किलो तक सहयोग प्रदान किया। प्रतिमा का कारीगरों द्वारा लाइव ढलाई का निर्माण किया गया। जिसके सभी ने दर्शन किए। प्रतिमा निर्माण में1 घंटे 30 मिनट का समय लगा। गर्म भट्टी में चांदी पिघाल कर सांचे में ढालने का कार्य किया गया। प्रतिमा निर्माण के समय ऐसा लगा कि सभी प्रसन्न थे और महावीर का जन्म हुआ।.....
कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु वंदना से हुआ।
इस अवसर पर भजन गायक कलाकारों ने मेरी लगी गुरु संग प्रीत दुनिया क्या जाने ... गुरु चरणों के करीब होता है वह खुश नसीब होता है। मां बिना सृष्टि रचना अधूरी होती है..गुरु चरणों में सर झुकाते हैं . मेरे सर पर गुरुवर तेरा हाथ चाहिए. त्रिशला नंदन वीर आदि भजनों की प्रस्तुतियां दी तो श्रद्धालु भक्तों ने कर्तल ध्वनि से स्वागत किया।
सभा का संचालन भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर मंडल ट्रस्ट के सचिव मनीष कोठारी और महावीर जिनालय ट्रस्ट अध्यक्ष राकेश जैन आंचलिया ने किया।