नीमच। जिले की मनासा तहसील के ग्राम कुंडला में शुक्रवार का दिन उत्सव जैसा रहा। भारतीय सेना में अपनी जिंदगी के 24 साल समर्पित करने के बाद जवान मुकेश राठौर जब सेवानिवृत्त होकर अपने पैतृक गांव पहुंचे, तो पूरे गांव ने एक जुट होकर उनका स्वागत किया। 3 अप्रैल की सुबह जैसे ही जवान ने गांव की सीमा में कदम रखा, ग्रामीणों ने उनका अभिनंदन शुरू कर दिया। मंदिर में हवन के साथ हुई दिन की शुरुआत- घर वापसी का यह कार्यक्रम धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हुआ। पैदल भ्रमण और जुलूस निकालने से पहले कुंडला गांव के तालाब किनारे स्थित प्रसिद्ध कालेश्वर मंदिर पर विशेष हवन का आयोजन किया गया। इस अनुष्ठान में परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने आहुतियां दीं। हवन संपन्न होने के बाद सुबह 11 बजे पैदल रैली की शुरुआत हुई। इस दौरान जवान मुकेश राठौर सैन्य वर्दी में नजर आए, जिन्हें देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर ग्रामीणों की भीड़ जमा रही। 6 किलोमीटर का पैदल भ्रमण- करीब 3500 की आबादी वाले कुंडला गांव में यह स्वागत कार्यक्रम काफी बड़ा रहा। मुकेश राठौर ने पूरे गांव में करीब 6 किलोमीटर लंबा सफर पैदल तय किया। इस दौरान वे गांव कुंडला की गलियों के साथ-साथ नई आबादी वाले इलाकों में भी पहुंचे। रैली के दौरान डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों ने माहौल को और भी उत्साहजनक बना दिया। युवा, महिलाएं और पुरुष गीतों की धुन पर झूमते हुए जवान के साथ चल रहे थे। सैकड़ों जगह पुष्प वर्षा, 9 प्रमुख स्थानों पर हुआ सम्मान- स्वागत के दौरान पूरे गांव ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। जैसे-जैसे मुकेश राठौर आगे बढ़ रहे थे, घरों की छतों और गलियों से उन पर सैकड़ों बार पुष्प वर्षा की गई। सम्मान की कड़ी में गांव के अलग-अलग 9 प्रमुख स्थानों पर रुककर जवान का साफा बांधकर विशेष सम्मान किया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के किसी लाल का इतनी लंबी सेवा के बाद वापस आना गर्व की बात है, इसलिए स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। बुजुर्गों का लिया आशीर्वाद- पैदल भ्रमण का मुख्य उद्देश्य गांव के वरिष्ठ जनों का आशीर्वाद लेना था। मुकेश राठौर हर गली और चौराहे पर खड़े बुजुर्गों के पास पहुंचे और उनके चरण स्पर्श किए। बुजुर्गों ने भी अपने हाथ उठाकर जवान को उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं दीं। सुबह 11 बजे कालेश्वर मंदिर से शुरू हुई यह पैदल रैली गांव के मुख्य मार्गों का चक्कर लगाते हुए वापस दोपहर में उसी मंदिर पर पहुंचकर संपन्न हुई। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव की एकता और सेना के प्रति सम्मान साफ दिखाई दिया। जवान के परिजनों ने बताया कि 24 साल तक देश की सीमाओं पर रहने के बाद अब मुकेश अपने परिवार और ग्रामीणों के बीच समय बिताएंगे। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया और बिना किसी शोर-शराबे के गरिमापूर्ण तरीके से स्वागत संपन्न हुआ।