नीमच। मध्यप्रदेश शासन के जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्राम कानाखेड़ा स्थित राममोहल्ला की ऐतिहासिक प्राचीन बावड़ी परिसर में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के मार्गदर्शन में 'बावड़ी उत्सव' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं तिलक-वंदन के साथ हुआ। इस अवसर पर मंदिर के मुख्य पुजारी महंत राघव गुरुजी तथा 100 वर्षीय रामचंद्रजी पुरोहित ने बावड़ी के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया, कि इस बावड़ी का निर्माण लगभग 16 माह में कराया गया था। निर्माण कार्य के लिए राजस्थान से कुशल मिस्त्रियों को बुलाया गया था। उन्होंने बताया, कि उनके पूर्वज पिछले चार पीढ़ियों से इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण करते आ रहे हैं और आज भी यह बावड़ी ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत बनी हुई है।
जिला समन्वयक नवनीत रत्नाकर ने बताया कि 19 मार्च से 30 जून तक संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिलेभर में नदियों, तालाबों, कुओं एवं बावड़ियों की साफ-सफाई, गहरीकरण तथा जन-जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। उन्होंने अभियान को सफल बनाने में जिला प्रशासन, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, नवांकुर संस्थाओं, सुरेश लोक शिक्षण समिति, ग्रीन विजन सेवा फाउंडेशन, जय श्री आरोग्य जन कल्याण समिति की टीना गर्ग, परामर्शदाताओं, सीएमसीएलडीपी के विद्यार्थियों तथा ग्रामीणजनों के सक्रिय सहयोग की सराहना की।
कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने वर्षा जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के संवर्धन तथा अधिकाधिक वर्षा जल को धरती में उतारने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र चौहान ने किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी, सीएमसीएलडीपी के छात्र-छात्राएँ तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।