KHABAR : डॉक्टर बेटी ने माँ को गुरू मान पहली दक्षिणा थमाई, माँ ने मार्मिकता से रूपए लिए बिना निशुल्क सेवा का वचन ले लिया, आंखो में असहायो का दर्द लिए सदा निस्वार्थ सेवा का बेटी ऐश्वर्या ने माँ मधु बंसल को दिया वचन:- पढ़े दिल को छू जाने वाली मां-बेटी की मिसाल

MP 44 NEWS September 3, 2022, 5:20 pm Technology

नीमच l माँ अपने बच्चें की पहली गुरू होती है, धरती पर माँ ब्रह्मा, माँ ही विष्णु और माँ ही महादेव होती है, ब्रह्मा जन्म देते है, विष्णु पालन करते है, और महादेव उद्धार करते है, जो तीनों देवों का कार्य अकेली करती है वह माँ होती है, इसलिए माँ का कोई दिन नही माँ की सदी होती है। इसी मोड़ पर अपनी माँ को याद करने वाली नीमच की बेटी डॉक्टर ऐश्वर्या बंसल को अपना सपना साकार करने पर पूरा देश और एमपी 44 प्रणाम करता है। आज के आधुनिक युग में जब ऊंचाईयो पर पहुंच जाने पर मां-बाप के लाडले अपने अभिभावको को आंख दिखाने का फैशन चल गया है उस वक्त बंसल परिवार की एक बिटिया न सिर्फ अपनी माँ को अपना पहला गुरू बताकर अपनी माता मधु बंसल के हाथ में न सिर्फ अपना वेतन रखती है बल्कि आंखो में आंसू लिए अपने वजूद को बनाने के लिए ह्दय की गहराईयो से आभार व्यक्त करती है। समाजसेवी मुधबंसल की बेटी ऐश्वर्या दिनरात की लगन-मेहनत और कठोर तपस्या के बलबुते डॉक्टर बनी तो माँ ने अपनी बेटी से रूपए नही बल्कि पूरे जीवन गरीबो की निशुल्क सेवा का वचन मांग लिया। बेटी ऐश्वर्या ने पलक झपकाए बगैर अपनी माँ के वचन को कबूल कर लिया और शरीर में आखरी सांस होने तक गरीबो, असहाय, बेबसो का सहारा बनने और उनके दुख-दर्दो पर मरहम-पट्टी करने का संकल्प ले लिया। एक तरफ जहां माँ ने अपनी बेटी को गरीबो का हमदर्द बनने की सलाह दी, तो दूसरी तरफ बेटी ने मॉर्डन युग में भारतीय संस्कृति की मानव सेवा की मिसाल कायम की। यह मिसाल न सिर्फ एक माँ-बेटी की है बल्कि भगवान का रूप कहे जाने वाले उन कारोबारी डॉक्टरो के लिए भी है जिन्होने डॉक्टरी पेशे को पैसे छापने वाली मशीन के रूप में ईस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यह तमाचा उन चिकित्सको पर है जिन्होने इंसानियत को ताक में रखकर भगवान की उपाधि को ठोकर मारी और पैसो को भगवान बना लिया है। बेटी डॉक्टर ऐश्वर्या से फोन पर हुई बातचीत को समाजसेवी मधुबंसल ने अपने शब्दो में उतारा:-

मेरी प्यारी बिटिया ऐश्वर्या डॉक्टर बन गई। समय पंख लगा कर उड़ता है पता ही नहीं चला ।आज आज सुबह उसने कहा कि मम्मी मेरी सैलरी का फर्स्ट चेक आया है आपके लिए क्या गिफ्ट लूं मैंने उससे हंसकर कहा बेटा हम कन्याओं का पैसा नहीं लेते है, तुम अपने पास जमा करो उसने जिद की तो मैंने कहा जो मांगूंगी वह दे सकती हो क्या? उसने कहा जरूर दूंगी मम्मी। मैंने उससे कहा मुझे वचन दे कि जीवन में कभी किसी गरीब से बीमारी के इलाज के लिए पैसा नहीं लेगी और ईश्वर ने जो तुझे मानवता की सेवा के लिए चुना है इस पुनीत कार्य को व्यापार नहीं बनाएगी ।उसने मुझे वचन दिया मेरा दिल गदगद हो गया ।मेरी लाख दुआएं उसके साथ जीवन में उत्तरोत्तर प्रगति करें खूब ऊंचाइयां पर जाएं अपने परिवार का अपने शहर का अपने देश का नाम रोशन करें आप सभी उसे आशीर्वाद दें।

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