नीमच से उज्जैन संभाग और उदयपुर तक भरोसे का नाम है ज्ञानोदय, गंभीर हालत में लाए गए मरीज को बचाने में झोंक दी पूरी ताकत नीमच में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल एक बार फिर चर्चा में है। एक तरफ अस्पताल के डॉक्टर मौत से जूझ रहे मरीज की जिंदगी बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकते रहे, तो दूसरी तरफ मरीज की मौत के बाद कुछ लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों ने माहौल को गर्मा दिया। अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले की सच्चाई सामने रखते हुए स्पष्ट किया है कि मरीज सुधीर चौहान पिता मनोहरलाल चौहान को 2 मार्च 2026 की रात 9:38 बजे अत्यंत गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। परिजनों के अनुसार इंदिरा नगर के भगवानपुरा चौराहे पर एक गाय के धक्का मारने से वह बुरी तरह घायल हो गया था। जब मरीज को अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में लाया गया, तब उसकी हालत बेहद नाजुक थी। मरीज अचेत अवस्था में था, शरीर में कोई हलचल नहीं थी, आंखों की पुतलियां फैल चुकी थीं और कान से खून का रिसाव हो रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक यह स्थिति बेहद गंभीर ब्रेन इंजरी की ओर इशारा कर रही थी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मरीज के परिजनों को उसी समय साफ-साफ बता दिया गया था कि हालत बेहद नाजुक है और जान को खतरा है। स्थिति की गंभीरता देखते हुए तुरंत ऑपरेशन की सलाह दी गई, जिस पर परिजनों ने सहमति दी। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को मरीज के मस्तिष्क में अत्यधिक सूजन मिली। सर्जरी के बाद मरीज को तुरंत आईसीयू में शिफ्ट कर लगातार निगरानी में रखा गया और हर संभव इलाज उपलब्ध कराया गया। अस्पताल का दावा है कि इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई। अस्पताल ने यह भी स्पष्ट किया कि मरीज के पास आयुष्मान कार्ड होने की जानकारी परिजनों ने अगले दिन 3 मार्च को दी, जिसके बाद इलाज को तुरंत आयुष्मान योजना के तहत शामिल कर लिया गया। उससे पहले जो 15 हजार रुपये लिए गए थे, वे आपातकालीन जांच और प्रक्रियाओं के लिए सुरक्षा राशि के रूप में जमा करवाए गए थे। प्रबंधन का कहना है कि मरीज की वास्तविक स्थिति से परिजनों को पहले ही अवगत करा दिया गया था, लेकिन मौत के बाद कुछ लोगों के बहकावे में आकर अस्पताल के खिलाफ भ्रम फैलाया जा रहा है, जो पूरी तरह तथ्यहीन है। गौरतलब है कि सेवा और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के दम पर ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल आज केवल नीमच ही नहीं बल्कि उज्जैन संभाग से लेकर राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र तक मरीजों के लिए भरोसे का बड़ा केंद्र बन चुका है। अस्पताल प्रबंधक डॉक्टर प्रदीप जैन और डायरेक्टर राजा चौरसिया का कहना है कि उनका एक ही लक्ष्य है— मरीज की जिंदगी बचाना और सेवा को ही अपना धर्म मानना।