नीमच। शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में आवश्यक बैठक रविवार 15 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे गांधी वाटिका प्रांगण में आयोजित की गई। जिसमें माननीय मुख्यमंत्री से निवेदन किया गया कि प्रदेश में लगभग 30 वर्षो से लगातार शासकीय विद्यालयों में निरन्तर रूप से अपनी सेवाऐं दे रहे है और बेहतर परीक्षा परिणाम भी उनके द्वारा दिया जा रहा है। परन्तु हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार पूरे देश में साथ ही मध्यप्रदेश में भी शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन किये जाने का विषय प्रस्तावित है जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार परीक्षा सन् 2009 से लागु की जाना थी जबकि प्रदेश में 1998 से लेकर आज तक जो भी भर्तिया की गई है वो मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार समय-समय पर की गई है। यह पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता 2009 से पूर्व कार्यरत एवं सेवारत् अध्यापकों पर लागु नहीं की जाना चाहिये। माननीय मुख्यमंत्री महोदय से निवेदन किया गया कि शासन की और से इन अध्यापकों एवं शिक्षकों के हित में अन्य राज्यों की तरह ही पुर्नरविचार याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लगाई जायें ताकि वर्षो से कार्यरत शिक्षकों और अध्यापकों को राहत मिल सकें। अन्यथा की स्थिति में मजबूर होकर शिक्षकों और अध्यापकों को आंदालेन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। बैठक में कंवरलाल, नागदा, मनीष पुरोहित, भारत राठौर, विनोद राठौर, संजय नागोरी, परसराम रावत, समर्थ गोस्वामी, सईद खान सहित सभी संघों के पदाधिकारी एवं जिले के सैकड़ों अध्यापक उपस्थित रहे।