भोपाल/नीमच। बस्तर की धरती से देश के गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर नक्सलवाद के खात्मे का शंखनाद किया है, लेकिन इस बार इस गौरवमयी गाथा के केंद्र में रहा मध्य प्रदेश का जांबाज पुलिस महकमा। बस्तर स्थित प्रतिष्ठित बादल अकादमी में आयोजित भव्य उजर बस्तर कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नक्सल उन्मूलन अभियान में बेमिसाल और उत्कृष्ट योगदान देने के लिए मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री कैलाश मकवाणा सहित सूबे के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और हॉक फोर्स के जांबाज रणबांकुरों को सम्मानित किया। नक्सल विरोधी अभियानों में मध्य प्रदेश पुलिस की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे सूबे के डीजीपी कैलाश मकवाणा की दूरदर्शी सोच और उनकी बेदाग कार्यप्रणाली की सबसे अहम भूमिका रही है। पूरे पुलिस महकमे और जनता के बीच अपनी संवेदनशीलता और अटूट ईमानदारी के लिए पहचाने जाने वाले डीजीपी मकवाणा का लोहा आज पूरा देश मान रहा है। उनकी इसी कार्यप्रणाली और रणनीतिक कौशल की हमेशा से चारों तरफ प्रशंसा होती रही है, जिसका नतीजा आज इस बड़े मंच पर सम्मान के रूप में देखने को मिला। श्री अमित शाह के हाथों मिले इस सम्मान ने साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश के जंगलों से लेकर बस्तर की सीमाओं तक, नक्सलियों की कमर तोड़ने के लिए डीजीपी मकवाणा के नेतृत्व में बनाई गई योजनाएं कितनी सटीक और मारक साबित हुई हैं। समारोह के दौरान गृह मंत्री ने मध्य प्रदेश की एंटी-नक्सल यूनिट हॉक फोर्स के अधिकारियों और जवानों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि जिस साहस के साथ इस बल ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में नक्सलियों को खदेड़ा है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है। यह सम्मान केवल एक मेडल या प्रशस्ति पत्र नहीं है, बल्कि यह गवाही है उस ईमानदारी, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की, जिसे डीजीपी कैलाश मकवाणा ने मध्य प्रदेश पुलिस के रग-रग में फूंका है। इस सम्मान के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों के बचे-कुचे गढ़ भी पूरी तरह जमींदोज हो जाएंगे।