*KHABAR : अफीम किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु व्यापक नीति सुधार आवश्यक - सांसद सुधीर गुप्ता, पढ़े MP44 NEWS खबर*

MP44 NEWS June 15, 2026, 8:36 pm Technology

नीमच। नीमच के मंगलम रिसोर्ट में आयोजित जिला अफीम सलाहकार समिति की बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता ने अफीम उत्पादक किसानों की समस्याओं, सुझावों एवं मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि नीमच-मंदसौर-रतलाम क्षेत्र देश का सबसे बड़ा एवं प्रमुख अफीम उत्पादक क्षेत्र है, इसलिए यहां के किसानों की समस्याओं का समाधान केंद्र सरकार की आगामी अफीम नीति में प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। सांसद गुप्ता ने किसानों ने विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव एवं समस्याएं समिति के समक्ष रखीं, जिन पर विस्तृत चर्चा की गई। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि आगामी वर्ष के लिए औसत मॉर्फीन मानक 3.5 प्रतिशत निर्धारित किया जाए, ताकि प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने ओलावृष्टि, अतिवृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लाइसेंस नवीनीकरण में विशेष छूट देने की मांग भी रखी। उन्होने बैठक में कहा कि वर्ष 1998-99 से 2022-23 तक 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से अधिक औसत उत्पादन वाले किसानों को पुनः नीति में शामिल किया जाए तथा सभी सीपीएस किसानों को न्यूनतम 10-10 आरी क्षेत्र के लाइसेंस प्रदान किए जाएं। साथ ही पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर पात्र सीपीएस किसानों को चीरा पद्धति में शामिल करने और 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से अधिक पोस्ता भूसा उत्पादन देने वाले किसानों को भी चीरा पद्धति का लाभ देने पर विचार किया जाए। बैठक में सीपीएस किसानों के लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने, गुणवत्ता के आधार पर घटिया घोषित अफीम की फैक्ट्री रिपोर्ट सीधे संबंधित कार्यालयों को उपलब्ध कराने तथा 6 प्रतिशत से अधिक मॉर्फीन वाले किसानों को पुनः लाइसेंस का लाभ देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। साथ ही वर्ष 1995-96 से 2022-23 तक ऐसे पात्र किसानों को भी आगामी नीति में शामिल करने का सुझाव दिया गया। सांसद ने कहा कि जिन गांवों का पुराना खसरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वहां किसानों के पास उपलब्ध वैध दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस जारी किए जाएं। पूर्व वर्षों में फसल चोरी के कारण निरस्त लाइसेंसों की पुनः समीक्षा कर राहत प्रदान की जाए तथा वर्ष 1997-98 की व्यापक ओलावृष्टि को ध्यान में रखते हुए विशेष औसत मानकर किसानों को राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की भूमि दूसरे गांव में स्थित है, उन्हें निकटतम गांव में लाइसेंस संचालन की अनुमति मिले। जिन किसानों के वैध उत्तराधिकारी नहीं हैं, उनकी विधिवत वसीयत के आधार पर नामांतरण की व्यवस्था लागू हो तथा जिन परिवारों में परंपरागत रूप से एक से अधिक लाइसेंस रहे हैं, उनके वैध उत्तराधिकारियों के नाम पर भी लाइसेंस स्थानांतरित किए जाएं। सांसद सुधीर गुप्ता ने मुखिया ग्राम चयन में रोटेशन प्रणाली लागू करने, दोषमुक्त एनडीपीएस प्रकरण वाले किसानों को अनावश्यक पुलिस प्रक्रिया से मुक्त रखने, स्व-घोषणा के आधार पर लाइसेंस जारी करने तथा वर्ष 1998-99 से 2022-23 तक ऐसे किसानों को नीति में शामिल करने की मांग रखी जिनकी पिछले पांच वर्षों में से कम से कम तीन वर्षों की औसत उपज 100 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने सीपीएस तौल केन्द्रों की सूची समय पर जारी करने, अफीम फसल मुआवजा नीति की पुनर्समीक्षा करने, मुखिया ग्राम का पारिश्रमिक बढ़ाने तथा सीपीएस पद्धति के अंतर्गत पोस्ता भूसा के समर्थन मूल्य में वृद्धि करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि उत्पादन, कटाई, भंडारण, सुरक्षा एवं निगरानी की बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों को उचित मूल्य मिलना अत्यंत आवश्यक है। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि जिला अफीम सलाहकार समिति किसानों और शासन के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करती है। बैठक में प्राप्त सभी सुझावों को समिति के माध्यम से उच्च स्तर पर भेजा जाएगा, ताकि आगामी अफीम नीति अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और किसान हितैषी बन सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सुझावों पर सकारात्मक निर्णय होने से नीमच, मंदसौर और रतलाम जिले के हजारों अफीम उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा। बैठक में राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर, जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा, नारकोटिक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं अफीम उत्पादक किसानों के प्रतिनिधिमंडल उपस्थित रहे

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