*KHABAR : 238 किलो अफीम तस्करी मामले में बड़ा फैसला: 3 तस्करों को 17-17 साल की सजा, 2-2 लाख का जुर्माना, पढ़े MP44 NEWS खबर*

MP44 NEWS June 14, 2026, 11:25 am Technology

नीमच। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) नीमच द्वारा पकड़ी गई 238.619 किलोग्राम अफीम तस्करी के बहुचर्चित मामले में एनडीपीएस विशेष न्यायालय नीमच ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया।विशेष लोक अभियोजक सुशील ऐरन ने बताया कि विशेष न्यायाधीश जितेंद्र कुमार बाजोलिया ने आरोपी सुखराम माचरा, जगदीश सियाग और हेतराम विश्नोई को 17-17 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 2-2 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर प्रत्येक को अतिरिक्त एक वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा। क्या था मामला सीबीएन को 14 नवंबर 2022 को गुप्त सूचना मिली थी कि राजस्थान के कुछ तस्कर मणिपुर क्षेत्र से भारी मात्रा में अफीम लेकर ट्रेलरों के माध्यम से जोधपुर की ओर जा रहे हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि तस्करी गिरोह का संचालन राजस्थान पुलिस के तत्कालीन सहायक उपनिरीक्षक मोहनलाल भादू के संरक्षण में किया जा रहा है। सूचना के आधार पर सीबीएन की टीम जयपुर-आगरा हाईवे स्थित राजाधौक टोल प्लाजा पहुंची, जहां ट्रेलर क्रमांक RJ-07-GC-4746 को रोका गया। वाहन में मांगीलाल, सुखराम और जगदीश सवार थे। रास्ते में फिल्मी अंदाज में भागने की कोशिश जांच के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि ट्रेलर में अफीम छिपाकर रखी गई है। टीम ट्रेलर को लेकर नीमच आ रही थी, तभी रास्ते में चालक सुखराम ने कथित रूप से भागने की नीयत से सीबीएन की सरकारी स्कॉर्पियो को पीछे से दो बार जोरदार टक्कर मार दी। इसके बाद ट्रेलर को हाईवे किनारे खड़ी हार्वेस्टर मशीन से भिड़ा दिया गया। दुर्घटना में सरकारी वाहन और ट्रेलर दोनों क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन सीबीएन टीम ने आरोपियों को काबू में रखा और वाहन को नीमच लाया। ट्रेलर के गुप्त चैंबर और टूल बॉक्स से मिली अफीम नीमच कार्यालय में तलाशी के दौरान ट्रेलर के टूल बॉक्स और विशेष रूप से बनाए गए गुप्त चैंबर से कुल 95 पैकेट बरामद हुए। जांच में इनमें से 102.910 किलोग्राम अफीम एक ट्रेलर से तथा बाद की कार्रवाई में अन्य ट्रेलरों से 135.709 किलोग्राम अफीम जब्त हुई। कुल बरामदगी 238.619 किलोग्राम अफीम रही, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत वाणिज्यिक मात्रा से कई गुना अधिक है। अदालत ने क्या कहा विशेष न्यायालय ने माना कि आरोपी सुखराम, जगदीश और हेतराम का अफीम के परिवहन और अवैध कब्जे में सीधा संबंध साबित हुआ है। न्यायालय ने यह भी माना कि हेतराम ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र और दुष्प्रेरण में भूमिका निभाई। सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों की पारिवारिक परिस्थितियों, वृद्ध माता-पिता और पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का हवाला देते हुए न्यूनतम सजा की मांग की। वहीं विशेष लोक अभियोजक सुशील ऐरन ने तर्क दिया कि जब्त अफीम में लगभग 16 प्रतिशत मॉर्फिन पाई गई है, जिससे करीब 24 किलोग्राम हेरोइन तैयार की जा सकती थी और इससे हजारों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती थी। 17 साल की सजा क्यों महत्वपूर्ण एनडीपीएस एक्ट में वाणिज्यिक मात्रा के मामलों में न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। अदालत ने अपराध की गंभीरता, बरामद मादक पदार्थ की भारी मात्रा और तस्करी के संगठित नेटवर्क को देखते हुए तीनों दोषियों को 17 वर्ष का सश्रम कारावास सुनाया, जो न्यूनतम सजा से काफी अधिक है। अन्य आरोपी अब भी फरार मामले में मुख्य आरोपी बताए गए मांगीलाल अभी भी फरार हैं। न्यायालय ने आदेश में उल्लेख किया है कि अन्य आरोपियों के संबंध में अनुसंधान अभी अपूर्ण है, इसलिए जब्त संपत्ति के अंतिम निस्तारण पर फिलहाल कोई आदेश नहीं दिया गया है। सजा का सार आरोपी दोष सिद्ध धारा सजा सुखराम माचरा धारा 8/18(बी) एनडीपीएस एक्ट 17 वर्ष सश्रम कारावास + ₹2 लाख जुर्माना जगदीश सियाग धारा 8/18(बी) एनडीपीएस एक्ट 17 वर्ष सश्रम कारावास + ₹2 लाख जुर्माना हेतराम विश्नोई धारा 8/18(बी) सहपठित धारा 29 एनडीपीएस एक्ट 17 वर्ष सश्रम कारावास + ₹2 लाख जुर्माना न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि आरोपियों द्वारा न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि उनकी सजा में समायोजित की जाएगी।

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