BIG_NEWS : ऑनलाइन ठगो का एक और मास्टर प्लान, बिना लोन लिए ही लोगो को कर रहे परेशान, किश्ते भरने का बना रहे दबाव, अब नीमच का शख्स ने लगाई गुहार, अगर आप ने भी करवाया है ऑनलाइन लोन तो हो जाए सावधान

MP 44 NEWS September 18, 2022, 4:52 pm Technology

नीमच (मप्र): ऑनलाइन पेमेंट के बढ़ते चलन के बीच डिजिटल लोन देने वाले ऐप्स की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ गई है ऐसे में कई लोग चंद रुपयों के चलते मोबाइल एप से लोन ले बैठते है ऐसे ही बीते कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब लोगों ने ऑनलाइन ऐप से लोन लिया और फिर उन्‍हें पछताना पड़ा यहाँ तक की इन्हे ही नहीं इन लोगो की कॉन्टेक्ट लिस्ट में मौजूद लोगो को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है वे इन डिजिटल ऐप के माध्यम से लोन देने वाली अवैध कंपनियों ने लोगों को परेशान कर दिया है. ये कंपनियां लोन देकर लोगों को कर्ज में फंसा रही है. पिछले दिनों से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब लोन की वजह से लोगों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाने की कोशिश की ऐसे में हाल में एक मामला नीमच जिले से भी निकलकर आया है जहा दीपक कुमार बैरागी नाम के युवक ने पुलिस को शिकायत में बताया की उन्होंने किसी भी प्रकार से किसी भी ऑनलाइन एप से लोन लेने जैसे काम नहीं किया है बावजूद इसके उनके कॉन्टेक्ट लिस्ट में मौजूद कुछ लोगो को 3000-7000 और 16000 तक के लोन को जमा करवाने की बात कही है ऐसे में बैंकिंग रिकॉर्ड और मोबाइल एप की जानकारी को देखा गया तो ऐसी कोई एप प्ले स्टोर पर मिली ही नहीं यहाँ तक की बावजूद इसके वह लोग बिना कारण ही कॉन्टेक्ट लिस्ट में जुड़े लोगो से सम्पर्क करने लग गए ऐसे में पुलिस द्वारा जांच जारी यही और दीपक कुमार ने बताया की उनके मित्रो या कॉन्टेक्ट से चैट के दौरान उनका डाटा हैक करने जैसी बात भी हुई चुकी जब वह मना कर देते की दीपक को नहीं जानते तब वह कहते की इमरजेंसी नंबर में उन्हों का नंबर दीपक ने दिया है जबकि ऐसा है ही नहीं दीपक ने बताया की वह नए नंबर से पहले मेसेज कर रहे हे फिर आधार कार्ड जो की बदल चूका है उसे भेज रहे हे और फिर जब वह मना कर दे की नहीं जानते तब वीडियो कॉल या व्हाट्सप्प कर रहे है ऐसे में उनकी निजी जानकारी तक साझा हो रही है ऐसे में दीपक कुमार ने समाचार के माध्यम से भी अपील स्वरुप कही है की उनके किसी भी मित्र-व्यवहारिक मित्र-व्यापारिक साथी के पास कोई भी सन्देश आता है जो की कोई भी नया नंबर हो या वीडियो कॉल आये या मेरे डॉक्यूमेंट भेजे तो जवाब देने के बजाय आप उन्हें ब्लॉक करे या ग्रुप में जोड़ दिए जाने पर ब्लॉक करे एवं अगर आप बात करते है तो उसके बाद तमाम जवाबदारी बात करने वाले की होगी। चुकी ऐसी घटनाओ के बढ़ने के बाद अब सरकार इस समस्‍या को लेकर कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रही है. आरबीआई या सरकार से मंजूरी!: आपको बता दें कि प्‍ले स्‍टोर पर कई ऑनलाइन लोन देने वाले ऐप्स हैं. इनमें से ज्‍यादातर ऐप के पास आरबीआई की मंजूरी तक नहीं है और बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ये अपना कारोबार सालों से कर रहे हैं. ये कंपनियां लोन देने के बाद ग्राहकों से अवैध वसूली कर रही है. जिस वजह से कई लोग परेशान हो चुके हैं. ऐसे में इन कंपनियों के उत्पीड़न के कारण देश में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं.

वित्त मंत्रालय लेगा अब एक्‍शन: हाल ही में वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक हुई है. इसमें फैसला किया गया है कि आरबीआई सभी लीगल ऐप की लिस्‍ट तैयार करेगी. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEIT) को भी यह काम दिया गया है कि वह लीगल ऐप ही प्‍ले स्‍टोर पर रखें. इसके अलावा आरबीआई ऐसे खातों की निगरानी भी करने वाला है, जिनका उपयोग धन शोधन के लिए किया जा सकता है.

वित्त मंत्रालय ने कसा शिकंजा: वित्त मंत्रालय ने हाल ही में एक बयान दिया है जिसमें बताया गया है कि आरबीआई पेमेंट ‘एग्रीगेटर्स’ का रजिस्ट्रेशन समय सीमा में पूरा करें, उसके बाद किसी भी अपंजीकृत ऐप्‍स को काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

छोटी रकम का कर्ज, बेहद ऊंचा ब्याज: दरअसल ये मोबाइल एप्लिकेशन इसलिए पॉपुलर हो रहे हैं, क्योंकि इनके जरिए मजदूर, रेहड़ी चलाने वाले जैसे लेवल के लोगों को भी मिनटों में ऑनलाइन कर्ज मिल जाता है. ये लोन ऐप्स इन लोगों को बेहद छोटी रकम का कर्ज देते हैं, लेकिन बदले में 15 से 20 फीसदी तक का बेहद ऊंचा ब्याज वसूलते हैं. इनके कामकाज का तरीका कुछ-कुछ गली-मोहल्ले में ब्याज पर पैसा देने वाले अवैध सूदखोरों जैसा ही होता है, बस ये लोग ऑनलाइन काम करते हैं.

वैरीफिकेशन नहीं कराते मोबाइल डाटा हैक करते हैं: ये कस्टमर वैरीफिकेशन के लिए RBI की तरफ से तय नियम फॉलो नहीं करते बल्कि लोन लेने वाले का मोबाइल डाटा ही एक तरीके से हैक कर लेते हैं. लोन लेने वाले को मोबाइल में एप्लिकेशन डाउनलोड कर ऑनलाइन फॉर्म भरना पड़ता है. इससे पहले मोबाइल यूजर को फोन की कॉन्टेक्ट लिस्ट, फोटोज, वीडियोज और अन्य डिजिटल कंटेंट का एक्सेस एप्लिकेशन को देना पड़ता है. इसी के साथ सारा डाटा ऐप्स संचालकों के पास पहुंच जाता है.

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