KHABAR : मंदसौर में सैकड़ों भक्त अंगारों पर चले:चैत्र नवरात्रि पर शामगढ़ मंदिर में निभाई गई 'चूल' परंपरा, पढ़े MP44 NEWS की खबर

MP44 NEWS March 28, 2026, 7:36 pm Technology

मंदसौर जिले के शामगढ़ स्थित प्राचीन मां महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर 'चूल' परंपरा का निर्वहन किया गया। रामनवमी के दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं ने धधकते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट की। इस दौरान किसी भी भक्त को कोई चोट या जलन नहीं हुई। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना माना जाता है और इसे 'कांच के मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र नवरात्रि महापर्व की शुरुआत माता की विशाल चुनर और कलश यात्रा के साथ हुई थी। नौ दिनों तक माता का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर में भक्तों को माता तीन रूपों में दर्शन देती हैं—प्रातः बाल्यावस्था, दोपहर युवावस्था और संध्या वृद्धावस्था में। स्थानीय मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से की गई हर कामना यहां पूरी होती है। रामनवमी के दिन दोपहर 2 बजे मुख्य यजमानों की उपस्थिति में हवन की पूर्णाहुति हुई, जिसके बाद महाआरती का आयोजन किया गया। इसके तुरंत बाद 'चूल' यानी अंगारों पर चलने का कार्यक्रम शुरू हुआ। मंदिर के मुख्य पुजारी दिलीप नाथ योगी ने एक हाथ में तलवार और दूसरे में खप्पर लेकर सबसे पहले अंगारों पर चलकर इस परंपरा का निर्वहन किया। पुजारी के बाद सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चों ने भी अपनी आस्था के साथ धधकते अंगारों पर कदम रखे। 'चूल' कार्यक्रम संपन्न होने के बाद 11 कन्याओं का पूजन किया गया। इसके उपरांत एक विशाल महा भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें नगर और आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर की प्राचीनता और 'चूल' परंपरा के महत्व पर स्थानीय भक्त बलवंत सिंह पवार ने बताया कि लगभग 200 वर्षों से यहां 'चूल' का आयोजन निरंतर चल रहा है। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार राजा होलकर के अस्वस्थ होने पर उन्होंने माता से प्रार्थना की थी और 'चूल' में सम्मिलित होकर अंगारों पर चले थे, जिससे उन्हें लाभ मिला था। भक्तों का मानना है कि मां महिषासुर मर्दिनी की कृपा से अग्नि भी शीतल हो जाती है, जो इस 'चूल' परंपरा का आधार है।

Related Post

window.OneSignal = window.OneSignal || []; OneSignal.push(function() { OneSignal.init({ appId: "6f6216f2-3608-4988-b216-8d496a752a67", }); });