KHABAR : चोला चढ़ाने के लिए 2048 तक बुकिंग फुल:मंदसौर के तलाई वाले बालाजी मंदिर में दशकों बाद आता है नंबर, पढ़े MP44 NEWS खबर

MP44NEWS April 3, 2026, 11:25 am Technology

मंदसौर। शहर के प्रसिद्ध तलाई वाले बालाजी मंदिर में हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटी और दिनभर पूजा-अर्चना, पाठ और विशेष अनुष्ठानों का सिलसिला रात देर तक चलता रहा। मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा है चोला चढ़ाने की प्रतीक्षा, जिसे देखकर श्रद्धालु हैरान रह जाते हैं। मंगलवार के लिए वर्तमान में वर्ष 2048 और शनिवार के लिए वर्ष 2047 तक की बुकिंग पूरी तरह फुल हो चुकी है। सामान्य दिनों में भी चोला चढ़ाने के लिए करीब 10 साल का इंतजार करना पड़ता है। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर इस बार वर्ष 2010 की बुकिंग का चोला चढ़ाया गया। करीब 16 साल के इंतजार के बाद ओमप्रकाश पोरवाल को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। गांधी चौराहा और बालागंज क्षेत्र के बीच स्थित यह मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक भक्तों से गुलजार रहता है। श्रद्धालु यहां नियमित रूप से रामरक्षा स्तोत्र, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। मंदिर में दर्शन और चोला चढ़ाने से दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। भक्त यहां लड्डू-चूरमा का प्रसाद अर्पित करते हैं और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं। मंदिर की प्रतिमा करीब 700 वर्ष पुरानी मानी जाती है। पहले यह वटवृक्ष के नीचे स्थापित थी। 1964 में ट्रस्ट गठन के बाद मंदिर का विकास शुरू हुआ और 1995 में भव्य पुनर्निर्माण किया गया। वर्तमान में मंदिर का शिखर 85 फीट ऊंचा है। साल 2024 में यहां स्वर्ण कलश स्थापना और 108 कुंडीय महायज्ञ भी आयोजित किया गया। मंदिर का नाम “तलाई वाले बालाजी” इसलिए पड़ा क्योंकि पहले यहां एक तलाई हुआ करती थी और उसके किनारे बड़ के पेड़ के नीचे भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित थी। समय के साथ क्षेत्र का विकास हुआ और अब वहां तरणताल है, लेकिन मंदिर की पहचान आज भी उसी नाम से है। मंदिर की आस्था केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। पुजारी के अनुसार अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के चुनाव के दौरान भी यहां हवन कराया गया था। हनुमान जन्मोत्सव पर तलाई वाले बालाजी मंदिर में उमड़ी श्रद्धा यह दर्शाती है कि यह मंदिर लोगों के जीवन में आस्था और विश्वास का केंद्र है। दशकों लंबी प्रतीक्षा और चोला चढ़ाने की परंपरा भक्तों के अटूट विश्वास का प्रतीक बनी हुई है।

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