नीमच। जिले में अफीम तौल प्रक्रिया के दौरान लागू की गई नई STD/WM प्रणाली को लेकर किसानों में गहराता असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी के तहत जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती के नेतृत्व में अफीम किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को नारकोटिक्स उपायुक्त संजय गांधी से मुलाकात कर किसानों की विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए त्वरित समाधान की मांग की। अफ़ीम फसल की खेती में आ रही समस्याओं की पैरवी करते हुए जिला अध्यक्ष तरुण बाहेती ने मजबूती से किसानों के हित की बात रखी और वर्तमान में किसानों को आ रही परेशानी पर त्वरित समाधान की माँग करी । प्रतिनिधि मंडल ने कहा की पूर्व सूचना के अचानक लागू की गई STD/WM तौल प्रणाली से किसानों में भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। किसानों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि उनकी अफीम किस गुणवत्ता श्रेणी में दर्ज की जा रही है, तौल के दौरान किस आधार पर कटौती की जा रही है और उन्हें वास्तविक लाभ या नुकसान कितना हो रहा है। स्थिति यह है कि तौल केंद्रों पर मौजूद अधिकारी भी किसानों को संतोषजनक जानकारी देने में सक्षम नहीं हैं, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने तौल प्रक्रिया में अपनाई जा रही ‘हाथ से जांच’ प्रणाली पर भी कड़ा एतराज जताया। उनका कहना था कि जब विभाग स्वयं यह दावा करता है कि अफीम की गुणवत्ता का अंतिम निर्धारण लैब की मशीनों द्वारा किया जाएगा, तो तौल केंद्रों पर अधिकारियों द्वारा हाथ से जांच कर उसे STD या WM घोषित करना पूरी तरह अनुचित और अवैज्ञानिक है। प्रतिनिधि मंडल ने मांग की कि या तो तौल के समय ही मशीन से गुणवत्ता जांच सुनिश्चित की जाए या फिर हाथ से जांच की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। ज्ञापन में अफीम नीति में मौजूद दोहरे मापदंडों को भी किसानों के साथ अन्यायपूर्ण बताया गया। कांग्रेस प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान में किसानों को उनकी उपज का भुगतान ‘गाढ़ता’ (कंसिस्टेंसी) के आधार पर किया जा रहा है, जबकि उनके पट्टे की पात्रता ‘मार्फीन’ की मात्रा पर निर्भर करती है। इस विसंगति के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जब सरकार गुणवत्ता का प्रमुख आधार ‘मार्फीन’ को मानती है, तो बेहतर मार्फीन वाली अफीम पर किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि या बोनस दिया जाना चाहिए और दोनों मापदंडों में समानता लाई जानी चाहिए। जिला कांग्रेस कमेटी के किसानों के साथ इस प्रतिनिधि मंडल ने किसानों के हित में कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं। इसमें मॉर्फिन की मात्रा बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना, पात्र किसानों की सूची पट्टा वितरण से पहले ऑनलाइन सार्वजनिक की जाये जिससे पट्टे के नाम पर होने वाला भ्रष्टाचार रुक सके, प्राकृतिक आपदाओं जैसे ओलावृष्टि या अतिवृष्टि से फसल खराब होने पर स्पष्ट राहत नीति बनाकर मुआवजा देना सुनिश्चित किया जाए इसके लिए एक ठोस नीति निर्धारित की जाए तथा बढ़ती लागत को देखते हुए अफीम के सरकारी खरीद भाव में वृद्धि करना शामिल है। साथ ही यह भी मांग की गई कि अफीम नीति तैयार करते समय अफीम किसानों को ‘मुखिया’ के माध्यम से उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाए, सीधे अफीम किसानों से सलाह ली जाए ताकि नीति अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बन सके। प्रतिनिधि मंडल ने नारकोटिक्स उपायुक्त से किसानों की इन सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने और मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आग्रह किया, ताकि किसानों को राहत मिल सके और तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता स्थापित हो सके। प्रतिनिधिमंडल ने नारकोटिक्स उपायुक्त से चर्चा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पारिख को माँग पत्र सौपा। प्रतिनिधि मंडल में जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती, पूर्व जिला अध्यक्ष अनिल चौरसिया,लक्ष्मीनारायण नागदा, मोहन सिंह जाट, देवीलाल पाटीदार, राम प्रताप जाट, मोहन विश्वकर्मा, यशवंत सोलंकी, मनीष गोस्वामी सहित अन्य किसान उपस्थित थे और जिन्होंने भी अपनी समस्याएं प्रतिनिधि मंडल के माध्यम से रखीं