नीमच। जावद में 45 वर्षीय आंगनवाड़ी रसोइया कंचन बाई मेघवाल ने 20 स्कूली बच्चों को मधुमक्खियों के भीषण हमले से बचाया। बच्चों को तिरपाल के नीचे सुरक्षित करते समय मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया था। जिससे उनकी मौत हो गई। कंचन बाई अपने परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य थीं। उनके पति लकवाग्रस्त हैं और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में है। मिडिया ने इस घटना को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद कंचन बाई की बहादुरी की पूरे देश में चर्चा हुई। प्रशासन ने मृतक के परिवार को चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। इंदौर के समाजसेवी और एक ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमलेश सोजतिया ने परिवार की आर्थिक स्थिति और उनके कठिन हालातों के बारे में जानने के बाद सहायता का निर्णय लिया।जिनेन्द्र सुराना और संजय शर्मा ने मृतका के गांव जाकर परिवार का विस्तृत सर्वेक्षण किया। उन्होंने पाया कि कंचन बाई की दो पुत्रियों का विवाह हो चुका है, पति लकवाग्रस्त हैं और बेटा बेरोजगार है। परिवार अनुसूचित जाति से संबंधित है। ऑर्गेनाइजेशन ने कंचन बाई के बेटे रवि मेघवाल को दो लाख रुपए और पुत्रियों वर्षा तथा चंदा को 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि देने का निर्णय लिया। यह राशि शनिवार को जावद में आयोजित एक समारोह में संस्था की महिला विंग की चेयरपर्सन रिंकू राठौर द्वारा सौंपी गई। इस अवसर पर नीमच से समाज के गणमान्य नागरिक और मेघवाल समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष उपस्थित थे वीडियो कॉल के माध्यम से उपाध्यक्ष कमलेश सोजतिया ने कहा कि भविष्य में भी संस्था ऐसे साहसिक कार्य करने वालों और उनके परिवारों की सहायता करती रहेगी।