चंबल के शांत किनारों पर रविवार सुबह एक नई उम्मीद ने उड़ान भरी। गांधीसागर अब सिर्फ जलाशय नहीं, बल्कि पक्षियों की दुनिया को करीब से देखने और समझने का ठिकाना बनने की ओर बढ़ रहा है। अटावी-बर्डिंग भारत की बर्ड वॉक में महज दो घंटे में 35 प्रजातियों की पहचान ने यह साबित कर दिया कि यहां प्रकृति की समृद्धि कितनी गहरी है। दूर-दूर से आए प्रकृति प्रेमियों ने जब जल, जंगल और आसमान के बीच पंखों की हलचल को महसूस किया, तो यह पहल सिर्फ एक आयोजन नहीं रही, बल्कि जिले में इको-टूरिज्म की नई शुरुआत बन गई। स्थानीय नेचुरलिस्ट की मौजूदगी में शुरू हुआ यह प्रयास अब गांधीसागर को प्रदेश के प्रमुख बर्ड वाचिंग सेंटर के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत कदम माना जा रहा है। रविवार को आयोजित ‘बर्डिंग भारत: अटावी बर्ड वॉक सीरीज’ के तहत गांधीसागर में पहली बर्ड वॉक ने उत्साहजनक परिणाम दिए। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से हुए इस आयोजन में प्रतिभागियों ने चंबल नदी के किनारे प्राकृतिक आवास में विभिन्न जलीय पक्षियों को देखा और उनकी पहचान की बारीकियां सीखीं। टीम ने बताया कि क्षेत्र में पक्षियों की विविधता बेहद समृद्ध है, जिसे संरक्षित और प्रचारित करने की जरूरत है। सिर्फ 2 घंटे में हमने अलग-अलग पक्षियों को देखा व उनकी जानकारी ली। करीब 35 प्रजातियों के पक्षी इस दौरान देखे गए। इस पहल का उद्देश्य गांधीसागर को बर्ड वाचिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना और स्थानीय स्तर पर इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे अनोखा अनुभव बताते हुए सराहना की। आयोजकों के अनुसार यदि इसी तरह का उत्साह बना रहा, तो यह बर्ड वॉक हर रविवार आयोजित की जाएगी। इससे न सिर्फ पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और प्रकृति संरक्षण के नए अवसर भी मिलेंगे। इस तरह की एक्टिविटी इको टूरिज्म को बढ़ाती हैं गांधीसागर क्षेत्र पक्षी विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध है। यहां 250 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इस तरह की बर्ड वॉक जैसी गतिविधियां ईको टूरिज्म को भी मजबूत आधार देती हैं। रविवार को गांधीसागर के साथ इंदौर और भोपाल में भी एक साथ बर्ड वॉक आयोजित हुई। यदि इसी तरह लोगों की भागीदारी बढ़ती रही तो यह क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख बर्ड वाचिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो सकता है।