पद और स्थान बदल सकते हैं, लेकिन जमीनी जुड़ाव नहीं—यह बात एक बार फिर उस वक्त सामने आई जब नीमच के पूर्व पुलिस अधीक्षक और वर्तमान डीआईजी राकेश कुमार सागर अल्प प्रवास पर शहर पहुंचे। औपचारिक कार्यक्रम से अलग यह दौरा पुराने रिश्तों, पुलिसिंग के अनुभव और सामाजिक संवाद का केंद्र बन गया। शुक्रवार को नीमच पहुंचे डीआईजी सागर ने शहर में अपने कार्यकाल के दौरान बने संपर्कों को ताजा किया। समाजसेवी रमेश कदम के निवास पर उनका स्वागत किया गया, जहां शहर के कई सामाजिक और प्रबुद्धजन उनसे मिलने पहुंचे। मुलाकात महज औपचारिकता नहीं रही, बल्कि पुराने कामकाज और नीमच मॉडल पुलिसिंग की चर्चा तक जा पहुंची। नीमच में करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल—एडीशनल एसपी और एसपी के रूप में—रह चुके सागर ने पत्रकारों से चर्चा में “सोशल पुलिसिंग” को सबसे प्रभावी तरीका बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस और आमजन के बीच विश्वास का रिश्ता ही कानून व्यवस्था की असली ताकत है। इसी सोच के तहत उनके कार्यकाल में “हेलमेट बैंक” जैसे प्रयोग शुरू किए गए, जो आज भी चर्चा में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग पुलिस और जनता के बीच संवाद को मजबूत कर सकता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी से किया जाए। वहीं, स्वागत के दौरान समाजसेवी रमेश कदम ने सागर के कार्यकाल को “जनता से जुड़ा और परिणाम देने वाला” बताया। उन्होंने कहा कि सागर ने नीमच में रहकर न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई, बल्कि समाज के साथ संवाद की परंपरा भी स्थापित की। डीआईजी सागर के इस संक्षिप्त दौरे ने यह साफ कर दिया कि मजबूत पुलिसिंग केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के साथ भरोसे का रिश्ता बनाना ही उसकी असली पहचान है।